श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 253: स्थूल, सूक्ष्म और कारण-शरीरसे भिन्न जीवात्माका और परमात्माका योगके द्वारा साक्षात्कार करनेका प्रकार  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.253.1 
व्यास उवाच
शरीराद् विप्रमुक्तं हि सूक्ष्मभूतं शरीरिणम्।
कर्मभि: परिपश्यन्ति शास्त्रोक्तै: शास्त्रवेदिन:॥ १॥
 
 
अनुवाद
व्यासजी कहते हैं - बेटा! योगशास्त्र के ज्ञाता लोग शास्त्रों में वर्णित कर्मों के द्वारा आत्मा के सूक्ष्म रूप को स्थूल शरीर से निकलते हुए देखते हैं।1॥
 
Vyasji says – Son! Those knowledgeable in Yogashastra see the subtle form of the soul emerging from the physical body through the actions mentioned in the scriptures. 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)