Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.251.7: इस संसार में कामना ही एकमात्र बंधन है, यहाँ कोई दूसरा बंधन नहीं है। जो कामना के बंधन से मुक्त हो जाता है, वह ब्रह्मभाव को प्राप्त करने में समर्थ हो जाता है। 7. | mahabharat अध्याय 12.251: ब्रह्मवेत्ता ब्राह्मणके लक्षण और परब्रह्मकी प्राप्तिका उपाय । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कामबन्धनमेवैकं नान्यदस्तीह बन्धनम्।
कामबन्धनमुक्तो हि ब्रह्मभूयाय कल्पते॥ ७॥
अनुवाद
इस संसार में कामना ही एकमात्र बंधन है, यहाँ कोई दूसरा बंधन नहीं है। जो कामना के बंधन से मुक्त हो जाता है, वह ब्रह्मभाव को प्राप्त करने में समर्थ हो जाता है। 7.
Desire is the only bondage in this world, there is no other bondage here. One who is free from the bondage of desire becomes capable of achieving Brahmabhaav. 7.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥