Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.251.6: जब वह अपने मन, वाणी या कर्म से किसी भी जीव को हानि पहुँचाने का विचार भी नहीं करता, तब वह ब्रह्मपद को प्राप्त होता है।   |   mahabharat अध्याय 12.251: ब्रह्मवेत्ता ब्राह्मणके लक्षण और परब्रह्मकी प्राप्तिका उपाय   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 251: ब्रह्मवेत्ता ब्राह्मणके लक्षण और परब्रह्मकी प्राप्तिका उपाय  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  12.251.6 
यदा न कुरुते भावं सर्वभूतेषु पापकम्।
कर्मणा मनसा वाचा ब्रह्म सम्पद्यते तदा॥ ६॥
 
 
अनुवाद
जब वह अपने मन, वाणी या कर्म से किसी भी जीव को हानि पहुँचाने का विचार भी नहीं करता, तब वह ब्रह्मपद को प्राप्त होता है।
 
When he does not even think of doing harm to any living being by his thoughts, speech or actions, then he attains the state of Brahman. 6.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)