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mahabharat 12.251.5: जब वह अन्य प्राणियों से नहीं डरता और अन्य प्राणी भी उससे नहीं डरते, तथा जब वह इच्छा और द्वेष को पूर्णतः त्याग देता है, उसी क्षण वह ब्रह्मपद को प्राप्त हो जाता है ॥5॥   |   mahabharat अध्याय 12.251: ब्रह्मवेत्ता ब्राह्मणके लक्षण और परब्रह्मकी प्राप्तिका उपाय   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 251: ब्रह्मवेत्ता ब्राह्मणके लक्षण और परब्रह्मकी प्राप्तिका उपाय  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  12.251.5 
यदा चायं न बिभेति यदा चास्मान्न बिभ्यति।
यदा नेच्छति न द्वेष्टि ब्रह्म सम्पद्यते तदा॥ ५॥
 
 
अनुवाद
जब वह अन्य प्राणियों से नहीं डरता और अन्य प्राणी भी उससे नहीं डरते, तथा जब वह इच्छा और द्वेष को पूर्णतः त्याग देता है, उसी क्षण वह ब्रह्मपद को प्राप्त हो जाता है ॥5॥
 
When he is not afraid of other creatures and other creatures are also not afraid of him, and when he completely abandons desire and hatred, at that very moment he achieves the state of Brahman. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)