Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.251.3: जो समस्त प्राणियों को अपना कुटुम्ब मानता है और उन पर दया करता है। वह जानने योग्य विषयों और समस्त वेदों के तत्वज्ञान को जानने वाला है और कामनाओं से मुक्त है। वह कभी नहीं मरता, अर्थात् जन्म-मरण के बंधन से सदा के लिए मुक्त हो जाता है। ऐसा नहीं है कि इन गुणों से युक्त मनुष्य ब्राह्मण नहीं है, अपितु वही सच्चा ब्राह्मण है। 3॥ | mahabharat अध्याय 12.251: ब्रह्मवेत्ता ब्राह्मणके लक्षण और परब्रह्मकी प्राप्तिका उपाय । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ज्ञातिवत् सर्वभूतानां सर्ववित् सर्ववेदवित्।
नाकामो म्रियते जातु न तेन न च वै द्विज:॥ ३॥
अनुवाद
जो समस्त प्राणियों को अपना कुटुम्ब मानता है और उन पर दया करता है। वह जानने योग्य विषयों और समस्त वेदों के तत्वज्ञान को जानने वाला है और कामनाओं से मुक्त है। वह कभी नहीं मरता, अर्थात् जन्म-मरण के बंधन से सदा के लिए मुक्त हो जाता है। ऐसा नहीं है कि इन गुणों से युक्त मनुष्य ब्राह्मण नहीं है, अपितु वही सच्चा ब्राह्मण है। 3॥
Who considers all living beings as his family and has mercy on them. He is the knower of the things worth knowing and the Tatvgya of all the Vedas and is free from desires. He never dies, that is, he is freed from the bondage of birth and death forever. It is not that a man endowed with these characteristics is not a Brahmin, but he is a true Brahmin. 3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥