Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.251.23: जब मनुष्य समस्त बंधनों से पूर्णतया मुक्त होकर समता में स्थित हो जाता है, तब वह शरीर में स्थित रहते हुए भी इन्द्रियों और उनके विषयों की पहुँच से परे हो जाता है ॥23॥ | mahabharat अध्याय 12.251: ब्रह्मवेत्ता ब्राह्मणके लक्षण और परब्रह्मकी प्राप्तिका उपाय । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स यदा सर्वतो मुक्त: सम: पर्यवतिष्ठते।
इन्द्रियाणीन्द्रियार्थांश्च शरीरस्थोऽतिवर्तते॥ २३॥
अनुवाद
जब मनुष्य समस्त बंधनों से पूर्णतया मुक्त होकर समता में स्थित हो जाता है, तब वह शरीर में स्थित रहते हुए भी इन्द्रियों और उनके विषयों की पहुँच से परे हो जाता है ॥23॥
When a man is completely free from all bondages and is situated in equanimity, then, even though he is present in the body, he becomes beyond the reach of the senses and their objects. ॥23॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥