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तमतिक्रान्तकर्माणमतिक्रान्तगुणक्षयम्।
ब्राह्मणं विषयाश्लिष्टं जरामृत्यू न विन्दत:॥ २२॥
अनुवाद
जो ब्रह्मवेत्ता पुरुष गुणों और कर्मों के ऐश्वर्य का त्याग करके विषय-वासनाओं से मुक्त हो गया है, वह किंचित् मात्र भी मृत्यु को प्राप्त नहीं होता ॥22॥
That Brahmavetta man, who has become free from sensual desires by renouncing the opulence of qualities and deeds, does not get even the slightest death. 22॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥