Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.251.2: जो सम्पूर्ण वेदों का अध्ययन करता है, गुरु की सेवा में रहता है, ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करता है तथा ऋग्वेद, यजुर्वेद और सामवेद का सम्पूर्ण ज्ञान प्राप्त कर लेता है, वही मुख्य ब्राह्मण है॥2॥ | mahabharat अध्याय 12.251: ब्रह्मवेत्ता ब्राह्मणके लक्षण और परब्रह्मकी प्राप्तिका उपाय । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सर्वान् वेदानधीयीत शुश्रूषुर्ब्रह्मचर्यवान्।
ऋचो यजूंसि सामानि न तेन न स वै द्विज:॥ २॥
अनुवाद
जो सम्पूर्ण वेदों का अध्ययन करता है, गुरु की सेवा में रहता है, ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करता है तथा ऋग्वेद, यजुर्वेद और सामवेद का सम्पूर्ण ज्ञान प्राप्त कर लेता है, वही मुख्य ब्राह्मण है॥2॥
The one who studies the entire Vedas, remains in the service of Guru, observes the vow of celibacy and acquires complete knowledge of Rigveda, Yajurveda and Samaveda, he is the main Brahmin. 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥