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mahabharat 12.251.15: जो मनुष्य देह के अभिमान से मुक्त होकर सत्त्वप्रधान सत्य, बल, दान, तप, त्याग और शम इन छः गुणों तथा श्रवण, ध्यान और निदिध्यासन इन तीन साधनों द्वारा आत्मा को जानते हैं, वे इस शरीर में रहते हुए भी परम शांति को प्राप्त होते हैं॥15॥   |   mahabharat अध्याय 12.251: ब्रह्मवेत्ता ब्राह्मणके लक्षण और परब्रह्मकी प्राप्तिका उपाय   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 251: ब्रह्मवेत्ता ब्राह्मणके लक्षण और परब्रह्मकी प्राप्तिका उपाय  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  12.251.15 
षड्‍‍भि: सत्त्वगुणोपेतै: प्राज्ञैरधिगतं त्रिभि:।
ये विदु: प्रेत्य चात्मानमिहस्थं तं गुणं विदु:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य देह के अभिमान से मुक्त होकर सत्त्वप्रधान सत्य, बल, दान, तप, त्याग और शम इन छः गुणों तथा श्रवण, ध्यान और निदिध्यासन इन तीन साधनों द्वारा आत्मा को जानते हैं, वे इस शरीर में रहते हुए भी परम शांति को प्राप्त होते हैं॥15॥
 
Those who, freed from the pride of the body, know the soul through the six qualities of sattva-pradhaan truth, strength, charity, penance, renunciation and shame, and the threefold means of hearing, meditation and nididhyasan, while still living in this body, attain the quality of ultimate peace. 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)