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mahabharat 12.251.14: शोकरहित, ममतारहित, शान्त, प्रसन्नचित्त, कामनारहित और संतुष्ट - इन छह लक्षणों वाला पुरुष ज्ञान से पूर्णतया संतुष्ट होकर मोक्ष को प्राप्त होता है ॥14॥   |   mahabharat अध्याय 12.251: ब्रह्मवेत्ता ब्राह्मणके लक्षण और परब्रह्मकी प्राप्तिका उपाय   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 251: ब्रह्मवेत्ता ब्राह्मणके लक्षण और परब्रह्मकी प्राप्तिका उपाय  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  12.251.14 
विशोको निर्मम: शान्त: प्रसन्नात्मा विमत्सर:।
षड्‍‍भिर्लक्षणवानेतै: समग्र: पुनरेष्यति॥ १४॥
 
 
अनुवाद
शोकरहित, ममतारहित, शान्त, प्रसन्नचित्त, कामनारहित और संतुष्ट - इन छह लक्षणों वाला पुरुष ज्ञान से पूर्णतया संतुष्ट होकर मोक्ष को प्राप्त होता है ॥14॥
 
A person with these six characteristics – grief-free, affection-free, peaceful, happy-hearted, desire-free and contented – attains salvation by being completely satisfied with knowledge. 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)