श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 251: ब्रह्मवेत्ता ब्राह्मणके लक्षण और परब्रह्मकी प्राप्तिका उपाय  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  12.251.10 
स कामकान्तो न तु कामकाम:
स वै कामात् स्वर्गमुपैति देही॥ १०॥
 
 
अनुवाद
बुद्धिमान् पुरुष केवल भोगों की ही इच्छा करता है, परन्तु स्वयं भोगों की इच्छा नहीं करता। जो भोगों की इच्छा करता है और अपने शरीर का अभिमान करता है, वह अपनी इच्छाओं के फलस्वरूप स्वर्ग को जाता है॥10॥
 
The wise man desires only pleasures, but he does not desire them. The one who desires sensual pleasures and is proud of his body, goes to heaven as a result of his desires.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)