Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.250.8-9: जैसे फल-फूलों से लदे हुए अनेक शाखाओं वाले विशाल वृक्ष को अपने विषय में यह नहीं मालूम कि उसका फूल कहाँ है और उसका फल कहाँ है, वैसे ही आत्मा को भी यह नहीं मालूम कि वह कहाँ से आई है और कहाँ जाएगी। परन्तु शरीर में आत्मा से पृथक एक और अन्तर्यामी है, जो सब प्रकार से निरन्तर सबको देखता रहता है। ॥8-9॥ | mahabharat अध्याय 12.250: परमात्माकी प्राप्तिका साधन, संसार-नदीका वर्णन और ज्ञानसे ब्रह्मकी प्राप्ति । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यथा पुष्पफलोपेतो बहुशाखो महाद्रुम:।
आत्मनो नाभिजानीते क्व मे पुष्पं क्व मे फलम्॥ ८॥
एवमात्मा न जानीते क्व गमिष्ये कुतस्त्वहम्।
अन्यो ह्यत्रान्तरात्मास्ति य: सर्वमनुपश्यति॥ ९॥
अनुवाद
जैसे फल-फूलों से लदे हुए अनेक शाखाओं वाले विशाल वृक्ष को अपने विषय में यह नहीं मालूम कि उसका फूल कहाँ है और उसका फल कहाँ है, वैसे ही आत्मा को भी यह नहीं मालूम कि वह कहाँ से आई है और कहाँ जाएगी। परन्तु शरीर में आत्मा से पृथक एक और अन्तर्यामी है, जो सब प्रकार से निरन्तर सबको देखता रहता है। ॥8-9॥
Just as a huge tree with many branches full of fruits and flowers does not know about itself that where is its flower and where is its fruit; similarly the soul does not know where it has come from and where will it go. But in the body, there is another inner soul separate from the soul, which keeps watching everyone in every way continuously. ॥ 8-9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥