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mahabharat 12.250.3: जैसे पिता अपने छोटे पुत्रों को वश में रखता है, वैसे ही मनुष्य को भी अपनी चंचल इन्द्रियों को, जो सब विषयों पर झपटती हैं, बुद्धि के द्वारा वश में रखना चाहिए। ॥3॥   |   mahabharat अध्याय 12.250: परमात्माकी प्राप्तिका साधन, संसार-नदीका वर्णन और ज्ञानसे ब्रह्मकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 250: परमात्माकी प्राप्तिका साधन, संसार-नदीका वर्णन और ज्ञानसे ब्रह्मकी प्राप्ति  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.250.3 
इन्द्रियाणि प्रमाथीनि बुद्धॺा संयम्य यत्नत:।
सर्वतो निष्पतिष्णूनि पिता बालानिवात्मजान्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
जैसे पिता अपने छोटे पुत्रों को वश में रखता है, वैसे ही मनुष्य को भी अपनी चंचल इन्द्रियों को, जो सब विषयों पर झपटती हैं, बुद्धि के द्वारा वश में रखना चाहिए। ॥3॥
 
Just as a father controls his younger sons, similarly a man must try to control his turbulent senses, which pounce upon all objects, by means of his intellect and keep them under control. ॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)