Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.250.25: सत्पुत्र शुकदेव! यदि कोई प्रेममय, गुणवान और विषयासक्त पुत्र प्रश्न पूछे, तो पिता को संतुष्ट होकर उस जिज्ञासु पुत्र को जो कुछ मैंने आपसे कहा है, उसका यथार्थ रूप से उपदेश करना चाहिए॥25॥ | mahabharat अध्याय 12.250: परमात्माकी प्राप्तिका साधन, संसार-नदीका वर्णन और ज्ञानसे ब्रह्मकी प्राप्ति । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सत्पुत्र शुकदेव! यदि कोई प्रेममय, गुणवान और विषयासक्त पुत्र प्रश्न पूछे, तो पिता को संतुष्ट होकर उस जिज्ञासु पुत्र को जो कुछ मैंने आपसे कहा है, उसका यथार्थ रूप से उपदेश करना चाहिए॥25॥
Satputra Shukdev! If a loving, virtuous and sensual son asks a question, then the father, being satisfied, should accurately preach this knowledge to that inquisitive son, whatever I have told you. 25॥
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि शुकानुप्रश्ने पञ्चाशदधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २५०॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें शुकदेवका अनुप्रश्नविषयक दो सौ पचासवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २५०॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥