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mahabharat 12.250.22: जो ब्रह्म दुःख और सुख से रहित है तथा भूत, वर्तमान और भविष्य का स्वरूप है, वह न तो स्त्री है, न पुरुष है और न ही नपुंसक है ॥22॥   |   mahabharat अध्याय 12.250: परमात्माकी प्राप्तिका साधन, संसार-नदीका वर्णन और ज्ञानसे ब्रह्मकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 250: परमात्माकी प्राप्तिका साधन, संसार-नदीका वर्णन और ज्ञानसे ब्रह्मकी प्राप्ति  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  12.250.22 
नैव स्त्री न पुमानेतन्नैव चेदं नपुंसकम्।
अदु:खमसुखं ब्रह्म भूतभव्यभवात्मकम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
जो ब्रह्म दुःख और सुख से रहित है तथा भूत, वर्तमान और भविष्य का स्वरूप है, वह न तो स्त्री है, न पुरुष है और न ही नपुंसक है ॥22॥
 
The Brahma who is devoid of sorrow and joy and is the form of the past, present and future is neither a woman nor a man nor impotent. ॥22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)