Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.250.11: केंचुली उतार देने वाले सर्प की भाँति तू सब पापों से मुक्त हो जा और सद्बुद्धि प्राप्त करके तू यहाँ पापों और चिंताओं से मुक्त हो जाएगा ॥11॥   |   mahabharat अध्याय 12.250: परमात्माकी प्राप्तिका साधन, संसार-नदीका वर्णन और ज्ञानसे ब्रह्मकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 250: परमात्माकी प्राप्तिका साधन, संसार-नदीका वर्णन और ज्ञानसे ब्रह्मकी प्राप्ति  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  12.250.11 
विमुक्त: सर्वपापेभ्यो मुक्तत्वच इवोरग:।
परां बुद्धिमवाप्येह विपाप्मा विगतज्वर:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
केंचुली उतार देने वाले सर्प की भाँति तू सब पापों से मुक्त हो जा और सद्बुद्धि प्राप्त करके तू यहाँ पापों और चिंताओं से मुक्त हो जाएगा ॥11॥
 
Like a snake shedding its skin, become free from all sins and by gaining good wisdom you will become free from sins and worries here. ॥11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)