Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.250.10: मनुष्य ज्ञानरूपी प्रज्वलित ज्योति के द्वारा अपने भीतर ईश्वर को देखता है; वैसे ही तू भी अपनी आत्मा के द्वारा ईश्वर को अनुभव करके सर्वज्ञ और आत्म-अभिमान से रहित हो जा॥10॥ | mahabharat अध्याय 12.250: परमात्माकी प्राप्तिका साधन, संसार-नदीका वर्णन और ज्ञानसे ब्रह्मकी प्राप्ति । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मनुष्य ज्ञानरूपी प्रज्वलित ज्योति के द्वारा अपने भीतर ईश्वर को देखता है; वैसे ही तू भी अपनी आत्मा के द्वारा ईश्वर को अनुभव करके सर्वज्ञ और आत्म-अभिमान से रहित हो जा॥10॥
Man sees God within himself through the burning light of knowledge; Similarly, you too, after realizing God through your soul, become omniscient and devoid of self-respect. 10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥