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mahabharat 12.250.1: शुकदेवजी ने पूछा - पिताजी! इस संसार में जो धर्म अन्य सब धर्मों से श्रेष्ठ है तथा जो सब धर्मों में श्रेष्ठ है, उसका वर्णन कृपा करके कीजिए॥1॥   |   mahabharat अध्याय 12.250: परमात्माकी प्राप्तिका साधन, संसार-नदीका वर्णन और ज्ञानसे ब्रह्मकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 250: परमात्माकी प्राप्तिका साधन, संसार-नदीका वर्णन और ज्ञानसे ब्रह्मकी प्राप्ति  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.250.1 
शुक उवाच
यस्माद् धर्मात् परो धर्मो विद्यते नेह कश्चन।
यो विशिष्टश्च धर्मेभ्यस्तं भवान् प्रव्रवीतु मे॥ १॥
 
 
अनुवाद
शुकदेवजी ने पूछा - पिताजी! इस संसार में जो धर्म अन्य सब धर्मों से श्रेष्ठ है तथा जो सब धर्मों में श्रेष्ठ है, उसका वर्णन कृपा करके कीजिए॥1॥
 
Shukdev asked - Father! Please describe to me the religion in this world which is superior to all other religions and which is the best among all religions.॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)