Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.25.7: अवनति के समय शिल्पविद्या, मन्त्र और औषधियाँ कोई फल नहीं देतीं। उन्नति के समय जब इनका प्रयोग किया जाता है, तब काल की प्रेरणा से ये सफल होकर वृद्धि में सहायक होती हैं ॥7॥   |   mahabharat अध्याय 12.25: सेनजित् के उपदेशयुक्त उद्‍गारोंका उल्लेख करके व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 25: सेनजित् के उपदेशयुक्त उद्‍गारोंका उल्लेख करके व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  12.25.7 
नाभूतिकालेषु फलं ददन्ति
शिल्पानि मन्त्राश्च तथौषधानि।
तान्येव कालेन समाहितानि
सिद्धॺन्ति वर्धन्ति च भूतिकाले॥ ७॥
 
 
अनुवाद
अवनति के समय शिल्पविद्या, मन्त्र और औषधियाँ कोई फल नहीं देतीं। उन्नति के समय जब इनका प्रयोग किया जाता है, तब काल की प्रेरणा से ये सफल होकर वृद्धि में सहायक होती हैं ॥7॥
 
At the time of decline, craftsmanship, mantras and medicines do not give any results. When they are used at the time of progress, then with the inspiration of time they become successful and help in growth. ॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)