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mahabharat 12.25.36: जिस राजा का चरित्र स्वर्ग में रहते हुए भी नगर और क्षेत्र की प्रजा तथा मंत्रीगण सम्मान करते हैं, वह सब राजाओं में श्रेष्ठ है ॥36॥   |   mahabharat अध्याय 12.25: सेनजित् के उपदेशयुक्त उद्‍गारोंका उल्लेख करके व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 25: सेनजित् के उपदेशयुक्त उद्‍गारोंका उल्लेख करके व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  12.25.36 
यस्य वृत्तं नमस्यन्ति स्वर्गस्थस्यापि मानवा:।
पौरजानपदामात्या: स राजा राजसत्तम:॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
जिस राजा का चरित्र स्वर्ग में रहते हुए भी नगर और क्षेत्र की प्रजा तथा मंत्रीगण सम्मान करते हैं, वह सब राजाओं में श्रेष्ठ है ॥36॥
 
The king whose character is respected by the people and ministers of the city and region even while living in heaven, is the best among all kings. ॥ 36॥
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि राजधर्मानुशासनपर्वणि सेनजिदुपाख्याने पञ्चविंशोऽध्याय:॥ २५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत राजधर्मानुशासनपर्वमें सेनजित् का उपाख्यानविषयक पचीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २५॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)