Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.25.33: जो राजा अहंकार को त्यागकर अपनी बुद्धिमानी भरी नीति के अनुसार राज्य की रक्षा करता है, जो स्वभाव से ही यज्ञ के अनुष्ठान में लगा रहता है और धर्म की रक्षा को ध्यान में रखते हुए समस्त लोकों में विचरण करता है, वह महामनस्वी राजा शरीर त्यागने के बाद देवताओं के लोक में सुख भोगता है। | mahabharat अध्याय 12.25: सेनजित् के उपदेशयुक्त उद्गारोंका उल्लेख करके व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो राजा अहंकार को त्यागकर अपनी बुद्धिमानी भरी नीति के अनुसार राज्य की रक्षा करता है, जो स्वभाव से ही यज्ञ के अनुष्ठान में लगा रहता है और धर्म की रक्षा को ध्यान में रखते हुए समस्त लोकों में विचरण करता है, वह महामनस्वी राजा शरीर त्यागने के बाद देवताओं के लोक में सुख भोगता है।
The king who gives up his ego and protects his kingdom according to his wise policy, who by nature remains engaged in the rituals of Yagya and roams around in all the worlds keeping the protection of religion in mind, that great-minded king enjoys happiness in the world of gods after leaving his body.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥