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mahabharat 12.25.28: इस संसार में जो अत्यन्त मूर्ख हैं अथवा जो बुद्धि की अवस्था को प्राप्त हो चुके हैं, वे ही सुखी हैं; जो बीच में हैं, वे ही दुःख पाते हैं॥ 28॥   |   mahabharat अध्याय 12.25: सेनजित् के उपदेशयुक्त उद्‍गारोंका उल्लेख करके व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 25: सेनजित् के उपदेशयुक्त उद्‍गारोंका उल्लेख करके व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  12.25.28 
ये च मूढतमा लोके ये च बुद्धे: परं गता:।
त एव सुखमेधन्ते मध्यम: क्लिश्यते जन:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
इस संसार में जो अत्यन्त मूर्ख हैं अथवा जो बुद्धि की अवस्था को प्राप्त हो चुके हैं, वे ही सुखी हैं; जो बीच में हैं, वे ही दुःख पाते हैं॥ 28॥
 
‘In this world only those who are extremely foolish or who have attained the state of intellect are happy; those in between only suffer.’॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)