Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.25.2: युधिष्ठिर बोले - 'मुनिवर! यह पृथ्वी का राज्य और ये नाना प्रकार के सुख आज मेरे मन को प्रिय नहीं लग रहे हैं। यह दुःख मुझे चारों ओर से घेरे हुए है।॥ 2॥ | mahabharat अध्याय 12.25: सेनजित् के उपदेशयुक्त उद्गारोंका उल्लेख करके व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
युधिष्ठिर उवाच
न पार्थिवमिदं राज्यं न भोगाश्च पृथग्विधा:।
प्रीणयन्ति मनो मेऽद्य शोको मां रुन्धयत्ययम्॥ २॥
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले - 'मुनिवर! यह पृथ्वी का राज्य और ये नाना प्रकार के सुख आज मेरे मन को प्रिय नहीं लग रहे हैं। यह दुःख मुझे चारों ओर से घेरे हुए है।॥ 2॥
Yudhishthira said, 'Sage! This kingdom on earth and these different kinds of pleasures are not pleasing to my mind today. This sorrow is surrounding me from all sides.॥ 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥