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mahabharat 12.25.16: एक का मानना ​​है कि आत्मा मारती है। दूसरे का मानना ​​है कि आत्मा नहीं मारती। पाँच भौतिक शरीरों का जन्म और मृत्यु स्वाभाविक रूप से नियति है ॥16॥   |   mahabharat अध्याय 12.25: सेनजित् के उपदेशयुक्त उद्‍गारोंका उल्लेख करके व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 25: सेनजित् के उपदेशयुक्त उद्‍गारोंका उल्लेख करके व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  12.25.16 
हन्तीति मन्यते कश्चिन्न हन्तीत्यपि चापर:।
स्वभावतस्तु नियतौ भूतानां प्रभवाप्ययौ॥ १६॥
 
 
अनुवाद
एक का मानना ​​है कि आत्मा मारती है। दूसरे का मानना ​​है कि आत्मा नहीं मारती। पाँच भौतिक शरीरों का जन्म और मृत्यु स्वाभाविक रूप से नियति है ॥16॥
 
One believes that the soul kills. The other believes that the soul does not kill. Birth and death of the five physical bodies are naturally destined. ॥16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)