Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.25.14: (राजा सेनजित ने मन ही मन कहा) 'काल का यह कठिन चक्र सब मनुष्यों को प्रभावित करता है। एक दिन सभी राजा समय के साथ परिपक्व होकर मृत्यु के अधीन हो जाते हैं।॥14॥   |   mahabharat अध्याय 12.25: सेनजित् के उपदेशयुक्त उद्‍गारोंका उल्लेख करके व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 25: सेनजित् के उपदेशयुक्त उद्‍गारोंका उल्लेख करके व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  12.25.14 
सर्वानेवैष पर्यायो मर्त्यान् स्पृशति दु:सह:।
कालेन परिपक्वा हि म्रियन्ते सर्वपार्थिवा:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
(राजा सेनजित ने मन ही मन कहा) 'काल का यह कठिन चक्र सब मनुष्यों को प्रभावित करता है। एक दिन सभी राजा समय के साथ परिपक्व होकर मृत्यु के अधीन हो जाते हैं।॥14॥
 
(King Senjit said to himself) 'This difficult cycle of time affects all human beings. One day all kings become mature with time and become subject to death.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)