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mahabharat 12.25.10: इस संसार में पक्षी, सर्प, जंगली मृग, हाथी और पर्वतीय मृग भी बिना समय के मतवाले नहीं होते। स्त्रियाँ बिना समय के गर्भ धारण नहीं करतीं और बिना समय के सर्दी, गर्मी और वर्षा नहीं होती।॥10॥   |   mahabharat अध्याय 12.25: सेनजित् के उपदेशयुक्त उद्‍गारोंका उल्लेख करके व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 25: सेनजित् के उपदेशयुक्त उद्‍गारोंका उल्लेख करके व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  12.25.10 
नाकालमत्ता: खगपन्नगाश्च
मृगद्विपा: शैलमृगाश्च लोके।
नाकालत: स्त्रीषु भवन्ति गर्भा
नायान्त्यकाले शिशिरोष्णवर्षा:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
इस संसार में पक्षी, सर्प, जंगली मृग, हाथी और पर्वतीय मृग भी बिना समय के मतवाले नहीं होते। स्त्रियाँ बिना समय के गर्भ धारण नहीं करतीं और बिना समय के सर्दी, गर्मी और वर्षा नहीं होती।॥10॥
 
In this world, even birds, snakes, wild deers, elephants and mountain deers do not become inebriated without the right time. Women do not conceive without the right time and winter, summer and rain do not occur without the right time.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)