श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 249: ज्ञानके साधन तथा ज्ञानीके लक्षण और महिमा  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.249.2 
स्वभावयुक्तं तत् सर्वं यदिमान् सृजते गुणान्।
ऊर्णनाभिर्यथा सूत्रं सृजते तद्‍गुणांस्तथा॥ २॥
 
 
अनुवाद
जैसे मकड़ी अपने शरीर से तंतु उत्पन्न करती है, वैसे ही प्रकृति भी तीनों गुणों को उत्पन्न करती है। प्रकृति इन सब वस्तुओं को उत्पन्न करती है, और ये सब उसके स्वभाव से ही घटित होते हैं॥2॥
 
Just as a spider creates fibers from its body, in the same way nature also creates all the three gunas (material) of matter. Nature creates all these things, all of which happens from its nature.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)