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mahabharat 12.247.6: यद्यपि सभी शरीरों में पाँच ही तत्त्व हैं, फिर भी लोगों को उनमें जो भेद दिखाई देते हैं, उसका कारण यह है कि सभी तत्त्वों के रचयिता ब्रह्मा ने इन तत्त्वों को सभी जीवों में उनके कर्मानुसार न्यून या अधिक मात्रा में समाविष्ट कर दिया है ॥6॥   |   mahabharat अध्याय 12.247: महाभूतादि तत्त्वोंका विवेचन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 247: महाभूतादि तत्त्वोंका विवेचन  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  12.247.6 
महाभूतानि पञ्चैव सर्वभूतेषु भूतकृत्।
अकरोत् तात वैषम्यं यस्मिन् यदनुपश्यति॥ ६॥
 
 
अनुवाद
यद्यपि सभी शरीरों में पाँच ही तत्त्व हैं, फिर भी लोगों को उनमें जो भेद दिखाई देते हैं, उसका कारण यह है कि सभी तत्त्वों के रचयिता ब्रह्मा ने इन तत्त्वों को सभी जीवों में उनके कर्मानुसार न्यून या अधिक मात्रा में समाविष्ट कर दिया है ॥6॥
 
Although there are only five elements in all bodies, yet the reason behind the differences that people see in them is that Brahma, the creator of all elements, has included these elements in all living beings in more or less amounts according to their karma. ॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)