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mahabharat 12.247.18: आँख देखने का काम करती है, (यह संकेत है। सभी इन्द्रियों के कार्य इसी के द्वारा लक्षित किये गये हैं) मन संशय करता है और बुद्धि निर्णय करती है; किन्तु क्षेत्रज्ञ (आत्मा) इन सबका साक्षी कहा गया है।   |   mahabharat अध्याय 12.247: महाभूतादि तत्त्वोंका विवेचन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 247: महाभूतादि तत्त्वोंका विवेचन  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  12.247.18 
चक्षुरालोचनायैव संशयं कुरुते मन:।
बुद्धिरध्यवसानाय साक्षी क्षेत्रज्ञ उच्यते॥ १८॥
 
 
अनुवाद
आँख देखने का काम करती है, (यह संकेत है। सभी इन्द्रियों के कार्य इसी के द्वारा लक्षित किये गये हैं) मन संशय करता है और बुद्धि निर्णय करती है; किन्तु क्षेत्रज्ञ (आत्मा) इन सबका साक्षी कहा गया है।
 
The eye does the work of seeing, (this is a sign. The functions of all the senses have been targeted by it) the mind doubts and the intellect decides; but the knower of the field (soul) is called the witness of all these.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)