Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.246.6-7: बुद्धि के द्वारा मन सहित इन्द्रियों और उनके विषयों को अन्तःकरण में लीन करके जब योगी ध्यान के द्वारा विवेक द्वारा शुद्ध किए हुए मन को पूर्णतः शुद्ध करके नाना प्रकार के विचारणीय विषयों का चिन्तन किए बिना, स्वयं को कुछ भी करने में असमर्थ कर लेता है, अर्थात् कर्तापन के अभिमान से सर्वथा शून्य हो जाता है, तब उसका मन अविचलित होकर परम शान्ति से युक्त हो जाता है और वह अमृतस्वरूप भगवान को प्राप्त हो जाता है ॥6-7॥   |   mahabharat अध्याय 12.246: परमात्माकी श्रेष्ठता, उसके दर्शनका उपाय तथा इस ज्ञानमय उपदेशके पात्रका निर्णय   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 246: परमात्माकी श्रेष्ठता, उसके दर्शनका उपाय तथा इस ज्ञानमय उपदेशके पात्रका निर्णय  »  श्लोक 6-7
 
 
श्लोक  12.246.6-7 
अन्तरात्मनि संलीय मन:षष्ठानि मेधया।
इन्द्रियाणीन्द्रियार्थांश्च बहुचिन्त्यमचिन्तयन्॥ ६॥
ध्यानेनोपरमं कृत्वा विद्यासम्पादितं मन:।
अनीश्वर: प्रशान्तात्मा ततोऽर्च्छत्यमृतं पदम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
बुद्धि के द्वारा मन सहित इन्द्रियों और उनके विषयों को अन्तःकरण में लीन करके जब योगी ध्यान के द्वारा विवेक द्वारा शुद्ध किए हुए मन को पूर्णतः शुद्ध करके नाना प्रकार के विचारणीय विषयों का चिन्तन किए बिना, स्वयं को कुछ भी करने में असमर्थ कर लेता है, अर्थात् कर्तापन के अभिमान से सर्वथा शून्य हो जाता है, तब उसका मन अविचलित होकर परम शान्ति से युक्त हो जाता है और वह अमृतस्वरूप भगवान को प्राप्त हो जाता है ॥6-7॥
 
By absorbing the senses and their objects in the inner soul along with the mind through the intellect, when the Yogi, by completely purifying the mind purified by the Viveka through meditation, makes himself unable to do anything, without thinking about the various types of thoughtful matters, that is, he becomes completely void of the pride of being a doer, then his mind becomes unperturbed, filled with ultimate peace and he attains God in the form of nectar. 6-7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)