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mahabharat 12.246.2: जैसे चतुर सारथी अपने वश में किए हुए बलवान और उत्तम घोड़ों का उपयोग करता है, वैसे ही क्षेत्रज्ञ भी अपने वश में की हुई इन्द्रियों और मन की सहायता से अपना कार्य पूरा करता है॥ 2॥   |   mahabharat अध्याय 12.246: परमात्माकी श्रेष्ठता, उसके दर्शनका उपाय तथा इस ज्ञानमय उपदेशके पात्रका निर्णय   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 246: परमात्माकी श्रेष्ठता, उसके दर्शनका उपाय तथा इस ज्ञानमय उपदेशके पात्रका निर्णय  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.246.2 
तैश्चैवं कुरुते कार्यं मन:षष्ठैरिहेन्द्रियै:।
सुदान्तैरिव संयन्ता दृढै: परमवाजिभि:॥ २॥
 
 
अनुवाद
जैसे चतुर सारथी अपने वश में किए हुए बलवान और उत्तम घोड़ों का उपयोग करता है, वैसे ही क्षेत्रज्ञ भी अपने वश में की हुई इन्द्रियों और मन की सहायता से अपना कार्य पूरा करता है॥ 2॥
 
Just as a clever charioteer uses the strong and excellent horses under his control, similarly, the knower of the field also accomplishes his task with the help of his senses and mind under his control.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)