Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.246.15: बेटा! जैसे मनुष्य दही से मक्खन और लकड़ी से अग्नि निकालते हैं, वैसे ही मैंने शास्त्रों का मन्थन करके विद्वानों के लिए मोक्षरूपी यह ज्ञान देने वाला शास्त्र निकाला है॥15॥   |   mahabharat अध्याय 12.246: परमात्माकी श्रेष्ठता, उसके दर्शनका उपाय तथा इस ज्ञानमय उपदेशके पात्रका निर्णय   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 246: परमात्माकी श्रेष्ठता, उसके दर्शनका उपाय तथा इस ज्ञानमय उपदेशके पात्रका निर्णय  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  12.246.15 
नवनीतं यथा दध्न: काष्ठादग्निर्यथैव च।
तथैव विदुषां ज्ञानं पुत्र हेतो: समुद्‍धृतम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
बेटा! जैसे मनुष्य दही से मक्खन और लकड़ी से अग्नि निकालते हैं, वैसे ही मैंने शास्त्रों का मन्थन करके विद्वानों के लिए मोक्षरूपी यह ज्ञान देने वाला शास्त्र निकाला है॥15॥
 
Son! Just as men extract butter from curd and fire from wood, in the same way I have churned the scriptures and extracted this knowledge-giving scripture of salvation for the learned.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)