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धर्माख्यानेषु सर्वेषु सत्याख्याने च यद् वसु।
दशेदमृक्सहस्राणि निर्मथ्यामृतमुद्धृतम्॥ १४॥
अनुवाद
यह धर्म और सत्य की समस्त कथाओं का सार है। यह अमृततुल्य सार ऋग्वेद के दस हजार श्लोकों का मंथन करके निकाला गया है।॥14॥
This is the essence of all the stories of Dharma and Truth. This nectar-like essence has been extracted by churning the ten thousand verses of the Rig Veda. ॥14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥