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mahabharat 12.246.13: बेटा! मैंने जो उपदेश दिया है, वह तुम्हें ईश्वर का ज्ञान कराने वाला शास्त्र है। यह सम्पूर्ण वेदों का रहस्य है। इसे केवल अनुमान या आगम से नहीं जाना जा सकता; इसे केवल अनुभव से ही ठीक से समझा जा सकता है॥13॥   |   mahabharat अध्याय 12.246: परमात्माकी श्रेष्ठता, उसके दर्शनका उपाय तथा इस ज्ञानमय उपदेशके पात्रका निर्णय   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 246: परमात्माकी श्रेष्ठता, उसके दर्शनका उपाय तथा इस ज्ञानमय उपदेशके पात्रका निर्णय  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  12.246.13 
रहस्यं सर्ववेदानामनैतिह्यमनागमम्।
आत्मप्रत्ययिकं शास्त्रमिदं पुत्रानुशासनम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
बेटा! मैंने जो उपदेश दिया है, वह तुम्हें ईश्वर का ज्ञान कराने वाला शास्त्र है। यह सम्पूर्ण वेदों का रहस्य है। इसे केवल अनुमान या आगम से नहीं जाना जा सकता; इसे केवल अनुभव से ही ठीक से समझा जा सकता है॥13॥
 
Son! The advice I have given is a scripture that gives you the knowledge of God. This is the secret of the entire Vedas. It cannot be known by mere inference or Aagam; it can be understood correctly only by experience.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)