Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.246.12: जो पुरुष संयमित आहार और शुद्ध मन वाला होकर रात्रि के प्रथम और अंतिम प्रहर में उपर्युक्त प्रकार से भगवान् का ध्यान करता है, वही अपने अन्तःकरण में भगवान् को देखता है॥12॥ | mahabharat अध्याय 12.246: परमात्माकी श्रेष्ठता, उसके दर्शनका उपाय तथा इस ज्ञानमय उपदेशके पात्रका निर्णय । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवं पूर्वापरे काले युञ्जन्नात्मानमात्मनि।
लघ्वाहारो विशुद्धात्मा पश्यत्यात्मानमात्मनि॥ १२॥
अनुवाद
जो पुरुष संयमित आहार और शुद्ध मन वाला होकर रात्रि के प्रथम और अंतिम प्रहर में उपर्युक्त प्रकार से भगवान् का ध्यान करता है, वही अपने अन्तःकरण में भगवान् को देखता है॥12॥
He who, being a moderate eater and having a pure mind, engages himself in the meditation of God in the above-mentioned manner during the first and last hours of the night, he alone sees God in his inner self.॥ 12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥