Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.245.34: जो साधु ब्रह्मज्ञान के तेज से परिपूर्ण है और ब्रह्म में नित्य समर्पित है, वह अनंत और निर्भय लोकों को प्राप्त करता है। जो संसार के प्राणियों से कभी नहीं डरता, वह संसार के प्राणियों से भी कभी नहीं डरता। | mahabharat अध्याय 12.245: संन्यासीके आचरण और ज्ञानवान् संन्यासीकी प्रशंसा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तेजोमयो नित्यमय: पुराणो
लोकाननन्तानभयानुपैति।
भूतानि यस्मान्न त्रसन्ते कदाचित्
स भूतानां न त्रसते कदाचित्॥ ३४॥
अनुवाद
जो साधु ब्रह्मज्ञान के तेज से परिपूर्ण है और ब्रह्म में नित्य समर्पित है, वह अनंत और निर्भय लोकों को प्राप्त करता है। जो संसार के प्राणियों से कभी नहीं डरता, वह संसार के प्राणियों से भी कभी नहीं डरता।
The monk who is full of the brilliance of Brahmagyan and is eternally devoted to Brahma, attains infinite and fearless worlds. He who is never afraid of the creatures of the world, also never gets afraid of the creatures of the world.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥