Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.245.31: जो पृथ्वी पर रहते हुए भी उसमें आसक्त नहीं है, अज्ञेय सहित अनंत आकाश में स्थित है, जो भोग्यात्मा (शरीर) के अंतर्गत हृदयस्थान में जीवरूप से स्थित है, हिरण्मय (चमकदार प्रकाश) के शरीर के मध्य भाग में स्थित हृदयकमल के आसन पर, अण्डब्रह्माण्ड के भीतर उत्पन्न हुआ है; जिसमें अनेक अंगदेवता छोटे-छोटे पंखों के समान सुशोभित हैं और जो मोद और प्रमोद नामक दो मुख्य पंखों से सुशोभित है; जो उस स्वर्ण पक्षी रूपी आत्मा और ब्रह्म को जानता है, वह ज्ञानरूपी उज्ज्वल किरणों से प्रकाशित है॥31॥ | mahabharat अध्याय 12.245: संन्यासीके आचरण और ज्ञानवान् संन्यासीकी प्रशंसा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो पृथ्वी पर रहते हुए भी उसमें आसक्त नहीं है, अज्ञेय सहित अनंत आकाश में स्थित है, जो भोग्यात्मा (शरीर) के अंतर्गत हृदयस्थान में जीवरूप से स्थित है, हिरण्मय (चमकदार प्रकाश) के शरीर के मध्य भाग में स्थित हृदयकमल के आसन पर, अण्डब्रह्माण्ड के भीतर उत्पन्न हुआ है; जिसमें अनेक अंगदेवता छोटे-छोटे पंखों के समान सुशोभित हैं और जो मोद और प्रमोद नामक दो मुख्य पंखों से सुशोभित है; जो उस स्वर्ण पक्षी रूपी आत्मा और ब्रह्म को जानता है, वह ज्ञानरूपी उज्ज्वल किरणों से प्रकाशित है॥31॥
Who, despite living on the earth, is not attached to it, is situated in the infinite sky with incomprehensibility, who is present in the form of a creature in the heart space under the Bhogyatma (body), on the seat of the heart-lotus situated in the middle part of the body of the Hiranmay (shiny light), originated within the egg-universe; In which many Angadevatas are adorned like small wings and who is adorned with two main wings named Mod and Pramod; One who knows that golden bird-like soul and Brahma, is illuminated with the bright rays of knowledge. 31॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥