Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.245.29: जो अन्तर्यामी पुरुष और उसके परम परब्रह्म स्वरूप को जानते हैं, जो अपने तेजोमय स्वरूप से सम्पूर्ण जगत् में प्रकाशित हैं, जिनकी तीन धातुएँ (वर्ण-अकार, उकार, मकार) अर्थात् प्रणव वाचक हैं, जो त्रिगुणमय माया में सत्व आदि तीन गुणों से युक्त होकर उसके नियंता रूप में स्थित हैं और जिनके संसार-सम्बन्धी कार्य वृक्ष के सुन्दर पत्तों के समान फैले हुए हैं, वे समस्त लोकों में आदरणीय हैं और मनुष्यों सहित सभी देवता उनके शुभ कर्मों की प्रशंसा करते हैं॥29॥ | mahabharat अध्याय 12.245: संन्यासीके आचरण और ज्ञानवान् संन्यासीकी प्रशंसा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
देवं त्रिधातुं त्रिवृतं सुपर्णं
ये विद्युरग्रॺां परमात्मतां च।
ते सर्वलोकेषु महीयमाना
देवा: समर्त्या: सुकृतं वदन्ति॥ २९॥
अनुवाद
जो अन्तर्यामी पुरुष और उसके परम परब्रह्म स्वरूप को जानते हैं, जो अपने तेजोमय स्वरूप से सम्पूर्ण जगत् में प्रकाशित हैं, जिनकी तीन धातुएँ (वर्ण-अकार, उकार, मकार) अर्थात् प्रणव वाचक हैं, जो त्रिगुणमय माया में सत्व आदि तीन गुणों से युक्त होकर उसके नियंता रूप में स्थित हैं और जिनके संसार-सम्बन्धी कार्य वृक्ष के सुन्दर पत्तों के समान फैले हुए हैं, वे समस्त लोकों में आदरणीय हैं और मनुष्यों सहित सभी देवता उनके शुभ कर्मों की प्रशंसा करते हैं॥29॥
Those who know the inner man and his supreme Parabrahma form, who is illuminated in the whole world in his shining form, whose three metals (Varna-Akaar, Ukaar, Makar) i.e. Pranav is the reader, who is present in the three qualities of Sattva etc. in the Trigunmay Maya as its controller and whose world-related activities have spread like the beautiful leaves of a tree, are respected in all the worlds and All the gods along with humans praise his good deeds. 29॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥