Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.245.24: जो कामनाओं और सभी प्रकार के आरम्भों से रहित है, जो नमस्कार और स्तुति से दूर रहता है तथा सभी प्रकार के बंधनों से मुक्त है, उसे देवता ब्रह्म का ज्ञाता मानते हैं। | mahabharat अध्याय 12.245: संन्यासीके आचरण और ज्ञानवान् संन्यासीकी प्रशंसा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो कामनाओं और सभी प्रकार के आरम्भों से रहित है, जो नमस्कार और स्तुति से दूर रहता है तथा सभी प्रकार के बंधनों से मुक्त है, उसे देवता ब्रह्म का ज्ञाता मानते हैं।
He who is devoid of desires and all kinds of beginnings, who stays away from salutations and praises and is free from all types of bondages, is considered by the gods as the knower of Brahman. 24.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥