Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.245.21: इस प्रकार जो ज्ञानरूपी आनन्द से तृप्त हो जाता है और भय तथा कामनाओं से मुक्त हो जाता है, उसे मृत्यु पकड़ नहीं पाती। वह स्वयं ही मृत्यु से पार हो जाता है ॥21॥ | mahabharat अध्याय 12.245: संन्यासीके आचरण और ज्ञानवान् संन्यासीकी प्रशंसा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवं प्रज्ञानतृप्तस्य निर्भयस्य निराशिष:।
न मृत्युरतिगो भाव: स मृत्युमधिगच्छति॥ २१॥
अनुवाद
इस प्रकार जो ज्ञानरूपी आनन्द से तृप्त हो जाता है और भय तथा कामनाओं से मुक्त हो जाता है, उसे मृत्यु पकड़ नहीं पाती। वह स्वयं ही मृत्यु से पार हो जाता है ॥21॥
In this way, one who is satisfied with the bliss of knowledge and is free from fear and desires, death has no hold on him. He transcends death on his own. ॥ 21॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥