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mahabharat 12.245.20: जो अहिंसक, समदर्शी, सत्यवादी, धैर्यवान, संवेदनशील और समस्त प्राणियों को आश्रय देने वाला है, वह उत्तम मार्ग को प्राप्त करता है ॥20॥   |   mahabharat अध्याय 12.245: संन्यासीके आचरण और ज्ञानवान् संन्यासीकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 245: संन्यासीके आचरण और ज्ञानवान् संन्यासीकी प्रशंसा  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  12.245.20 
अहिंसक: सम: सत्यो धृतिमान् नियतेन्द्रिय:।
शरण्य: सर्वभूतानां गतिमाप्नोत्यनुत्तमाम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
जो अहिंसक, समदर्शी, सत्यवादी, धैर्यवान, संवेदनशील और समस्त प्राणियों को आश्रय देने वाला है, वह उत्तम मार्ग को प्राप्त करता है ॥20॥
 
One who is non-violent, equanimous, truthful, patient, sensitive and gives shelter to all living beings, attains the best path. 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)