Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.245.2: व्यासजी बोले, "पुत्र! ब्रह्मचर्य और गृहस्थ जीवन के कर्तव्यों द्वारा मन को शुद्ध करके मोक्ष प्राप्ति का वास्तविक कर्तव्य मैं तुम्हें बता रहा हूँ। तुम एकाग्रचित्त होकर मेरी बात सुनो।" | mahabharat अध्याय 12.245: संन्यासीके आचरण और ज्ञानवान् संन्यासीकी प्रशंसा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
व्यासजी बोले, "पुत्र! ब्रह्मचर्य और गृहस्थ जीवन के कर्तव्यों द्वारा मन को शुद्ध करके मोक्ष प्राप्ति का वास्तविक कर्तव्य मैं तुम्हें बता रहा हूँ। तुम एकाग्रचित्त होकर मेरी बात सुनो।"
Vyasa said, "Son! After purifying the mind through the duties of celibacy and the householder's life, I am telling you the actual duty to attain salvation. Listen to me with full concentration."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥