Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.245.14: जो न तो सम्मान पाकर प्रसन्न होता है और न अपमान पाकर क्रोधित होता है तथा जिसने समस्त प्राणियों को अभयदान दिया है, उसे देवता ब्रह्मवेत्ता मानते हैं ॥14॥ | mahabharat अध्याय 12.245: संन्यासीके आचरण और ज्ञानवान् संन्यासीकी प्रशंसा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न क्रुद्धॺेन्न प्रहृष्येच्च मानितोऽमानितश्च य:।
सर्वभूतेष्वभयदस्तं देवा ब्राह्मणं विदु:॥ १४॥
अनुवाद
जो न तो सम्मान पाकर प्रसन्न होता है और न अपमान पाकर क्रोधित होता है तथा जिसने समस्त प्राणियों को अभयदान दिया है, उसे देवता ब्रह्मवेत्ता मानते हैं ॥14॥
He who is not pleased on receiving honour, nor does he get angry on being insulted, and who has given protection to all creatures, is considered by the gods as the knower of Brahman. ॥ 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥