Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.244.10: वे वर्षा ऋतु में खुले आकाश के नीचे और शीत ऋतु में जल के भीतर खड़े रहते हैं। ग्रीष्म ऋतु आने पर वे पंचाग्नि से अपने शरीर को तपाते हैं और सदैव बहुत थोड़ा भोजन करते हैं।॥10॥ | mahabharat अध्याय 12.244: वानप्रस्थ और संन्यास-आश्रमके धर्म और महिमाका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वे वर्षा ऋतु में खुले आकाश के नीचे और शीत ऋतु में जल के भीतर खड़े रहते हैं। ग्रीष्म ऋतु आने पर वे पंचाग्नि से अपने शरीर को तपाते हैं और सदैव बहुत थोड़ा भोजन करते हैं।॥10॥
They stand under the open sky during the rainy season and underwater during winters. When summer comes, they heat their bodies with the Panchagni (five types of fires) and always eat very little food.॥10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥