Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.243.8-9: यदि कोई वेदों का पारंगत विद्वान, स्नातक, श्रोता, यज्ञ और श्राद्ध करने वाला, जितेन्द्रिय, कर्मशील, स्वधर्म से जीवन निर्वाह करने वाला तपस्वी ब्राह्मण द्वार पर अतिथि रूप में आ जाए, तो उसका सदैव विधिपूर्वक पूजन करना चाहिए तथा उसे हवन और काव्य अर्पण करना चाहिए। उनके सम्मान के लिए यह सब करने का विधान है। | mahabharat अध्याय 12.243: ब्राह्मणोंके उपलक्षणसे गार्हस्थ्य-धर्मका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यदि कोई वेदों का पारंगत विद्वान, स्नातक, श्रोता, यज्ञ और श्राद्ध करने वाला, जितेन्द्रिय, कर्मशील, स्वधर्म से जीवन निर्वाह करने वाला तपस्वी ब्राह्मण द्वार पर अतिथि रूप में आ जाए, तो उसका सदैव विधिपूर्वक पूजन करना चाहिए तथा उसे हवन और काव्य अर्पण करना चाहिए। उनके सम्मान के लिए यह सब करने का विधान है।
If an expert scholar of the Vedas, a graduate, a listener, a person who eats sacrificial food (yajnan) and poetry (shradhan), a jitendriya, an active person, an ascetic Brahmin who lives his life by his own religion, comes as a guest at the door, then one should always worship him duly and offer him sacrificial fire and poetry. There is a rule to do all this for their respect. 8-9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥