Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.243.5: शास्त्रों में गृहस्थों के लिए बहुत अच्छे नियम बताए गए हैं। उसे केवल अपने ही भोजन के लिए भोजन नहीं पकाना चाहिए (बल्कि देवताओं, पितरों और अतिथियों के निमित्त पकाना चाहिए) और प्राणियों की हत्या नहीं करनी चाहिए, क्योंकि वह हानिकारक है। ॥5॥ | mahabharat अध्याय 12.243: ब्राह्मणोंके उपलक्षणसे गार्हस्थ्य-धर्मका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
गृहमेधिव्रतान्यत्र महान्तीह प्रचक्षते।
नात्मार्थे पाचयेदन्नं न वृथा घातयेत् पशून्॥ ५॥
अनुवाद
शास्त्रों में गृहस्थों के लिए बहुत अच्छे नियम बताए गए हैं। उसे केवल अपने ही भोजन के लिए भोजन नहीं पकाना चाहिए (बल्कि देवताओं, पितरों और अतिथियों के निमित्त पकाना चाहिए) और प्राणियों की हत्या नहीं करनी चाहिए, क्योंकि वह हानिकारक है। ॥5॥
Many good rules have been given in the scriptures for householders. He should not cook food only for his own food (but should cook for the purpose of Gods, ancestors and guests) and should not kill animals, because it is harmful. ॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥