Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.243.29: इस गृहस्थाश्रम के बाद तीसरा तथा उससे भी उत्तम वानप्रस्थ आश्रम है; जो शरीर को सुखाकर, हड्डियों से चमड़ा निकालकर, वन में रहकर तपस्या द्वारा शरीर त्यागने वाले वानप्रस्थियों का आश्रय है। यह गृहस्थ आश्रमों में श्रेष्ठ माना गया है। अब मैं तुम्हें इसका तत्त्व बताता हूँ, सुनो। | mahabharat अध्याय 12.243: ब्राह्मणोंके उपलक्षणसे गार्हस्थ्य-धर्मका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इस गृहस्थाश्रम के बाद तीसरा तथा उससे भी उत्तम वानप्रस्थ आश्रम है; जो शरीर को सुखाकर, हड्डियों से चमड़ा निकालकर, वन में रहकर तपस्या द्वारा शरीर त्यागने वाले वानप्रस्थियों का आश्रय है। यह गृहस्थ आश्रमों में श्रेष्ठ माना गया है। अब मैं तुम्हें इसका तत्त्व बताता हूँ, सुनो।
After this Grahasthashram, the third and even better is the most generous Vanaprastha Ashram; which is the shelter of the Vanaprasthis who dry up their bodies and remove the skin from their bones and who live in the forest and give up their bodies through austerity. This is considered the best of the Grihasthas. Now I will tell you its principles, listen.
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि शुकानुप्रश्ने त्रिचत्वारिंशदधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २४३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें शुकदेवका अनुप्रश्नविषयक दो सौ तैंतालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २४३॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥