Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.243.28: मन और इन्द्रियों को वश में रखने वाले गृहस्थों के लिए स्वर्ग को सम्मान का स्थान बताया गया है। ब्रह्माजी ने गृहस्थ आश्रम को स्वर्ग प्राप्ति का कारण बनाया है, इसलिए इसका पालन करने का विधान किया गया है। इस प्रकार क्रमशः दूसरे आश्रम, गृहस्थ आश्रम को प्राप्त करके मनुष्य स्वर्ग में सम्मान प्राप्त करता है॥ 28॥   |   mahabharat अध्याय 12.243: ब्राह्मणोंके उपलक्षणसे गार्हस्थ्य-धर्मका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 243: ब्राह्मणोंके उपलक्षणसे गार्हस्थ्य-धर्मका वर्णन  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  12.243.28 
स्वर्गलोको गृहस्थानां प्रतिष्ठा नियतात्मनाम्।
ब्रह्मणा विहिता योनिरेषा यस्माद् विधीयते।
द्वितीयं क्रमश: प्राप्य स्वर्गलोके महीयते॥ २८॥
 
 
अनुवाद
मन और इन्द्रियों को वश में रखने वाले गृहस्थों के लिए स्वर्ग को सम्मान का स्थान बताया गया है। ब्रह्माजी ने गृहस्थ आश्रम को स्वर्ग प्राप्ति का कारण बनाया है, इसलिए इसका पालन करने का विधान किया गया है। इस प्रकार क्रमशः दूसरे आश्रम, गृहस्थ आश्रम को प्राप्त करके मनुष्य स्वर्ग में सम्मान प्राप्त करता है॥ 28॥
 
Heaven has been designated as the place of honour for householders who control their mind and senses. Brahmaji has made the Grihasthya Ashram the cause of attaining heaven; therefore, its observance has been prescribed. In this way, gradually after attaining the second Ashram, Grihasthya, a man attains honour in heaven.॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)