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mahabharat 12.243.22: किसी भी धार्मिक व्यक्ति को धन के लोभ से धार्मिक अनुष्ठान नहीं करने चाहिए। गृहस्थ ब्राह्मण के लिए बताए गए तीन कार्य क्रमशः श्रेष्ठ और लाभदायक हैं॥ 22॥   |   mahabharat अध्याय 12.243: ब्राह्मणोंके उपलक्षणसे गार्हस्थ्य-धर्मका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 243: ब्राह्मणोंके उपलक्षणसे गार्हस्थ्य-धर्मका वर्णन  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  12.243.22 
न चार्थबद्ध: कर्माणि धर्मवान् कश्चिदाचरेत्।
गृहस्थवृत्तयस्तिस्रस्तासां नि:श्रेयसं परम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
किसी भी धार्मिक व्यक्ति को धन के लोभ से धार्मिक अनुष्ठान नहीं करने चाहिए। गृहस्थ ब्राह्मण के लिए बताए गए तीन कार्य क्रमशः श्रेष्ठ और लाभदायक हैं॥ 22॥
 
No religious person should perform religious rites for the greed of money. The three occupations mentioned for a householder Brahmin are progressively better and beneficial.॥ 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)