Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.243.14-16: गृहस्थ पुरुष को चाहिए कि वह अपनी पत्नी से सदैव प्रेम करे। इन्द्रियों को वश में करके जितेन्द्रिय बने। किसी के गुणों में दोष न देखे। ऋत्विज, पुरोहित, गुरु, चाचा, अतिथि, शरणागत, वृद्ध, बालक, रोगी, वैद्य, कुल-बन्धु, कुटुम्बी, माता-पिता, कुल की स्त्रियाँ, भाई, पुत्र, स्त्री, पुत्री और सेवक-समूह से कभी विवाद न करे। जो इन सबसे संघर्ष त्याग देता है, वह सब पापों से मुक्त हो जाता है। 14-16॥ | mahabharat अध्याय 12.243: ब्राह्मणोंके उपलक्षणसे गार्हस्थ्य-धर्मका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
गृहस्थ पुरुष को चाहिए कि वह अपनी पत्नी से सदैव प्रेम करे। इन्द्रियों को वश में करके जितेन्द्रिय बने। किसी के गुणों में दोष न देखे। ऋत्विज, पुरोहित, गुरु, चाचा, अतिथि, शरणागत, वृद्ध, बालक, रोगी, वैद्य, कुल-बन्धु, कुटुम्बी, माता-पिता, कुल की स्त्रियाँ, भाई, पुत्र, स्त्री, पुत्री और सेवक-समूह से कभी विवाद न करे। जो इन सबसे संघर्ष त्याग देता है, वह सब पापों से मुक्त हो जाता है। 14-16॥
A family man should always love his own wife. Become Jitendriya by controlling the senses. Don't find fault in anyone's qualities. He should never dispute with Ritvija, priest, teacher, uncle, guest, surrendered person, old man, child, patient, doctor, caste-brother, relatives, relatives, parents, women of the family, brother, son, wife, daughter and group of servants. One who gives up conflict with all these, becomes free from all sins. 14-16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥